SDLC in Hindi | Software Development Life Cycle

इस लेख What is SDLC in Hindi में हम चर्चा करेंगे कि SDLC क्या है, इसके phases और कुछ लोकप्रिय SDLC models के बारे में। लेख को अंत तक पढ़ने के बाद आपको SDLC के बारे में पूरी जानकारी हो जाएगी।

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SDLC क्या है
SDLC के Phases
SDLC के प्रकार

What is SDLC in Hindi? (SDLC क्या है)

SDLC यानी Software Development Life Cycle कई processes का एक collection है जिन्हें हम follow करते है उच्च-गुणवत्ता वाले software को develop करने के लिये।

मान लीजिए आप एक software developer है और आपको अपने customer की expectations और requirements को पूरा करते हुए एक software बनाना है। इसके लिये आपको software development के कई phases से गुजरना होगा। जिसमें planning, designing, development, testing और deployment शामिल है।

संक्षेप में अगर समझे तो SDLC किसी भी software के पूरे development cycle को परिभाषित करता है। या कह सकते है किसी भी software को develop करने के लिये यह एक systematic और step by step process है।

आइये निम्नलिखित पॉइंट्स के माध्यम से Software development life cycle के महत्व को समझें:

  • SDLC process को follow करके हमें quality software develop करने में मदद मिलती है जो हमारे ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा करें।
  • हम जिस भी project पर काम कर रहे है उसके management पर हमारा बेहतर control होता है।
  • इसका अनुसरण करके हम अपनी productivity को maximize कर सकते हैं।
  • Customer की सभी requirements अच्छी तरह से defined होती है।
  • इसका उपयोग करके हमें cost-effective software बनाने में मदद मिलती हैं।

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Phases of SDLC in Hindi

SDLC Software Development Life Cycle in Hindi

SDLC के 7 phases निम्नलिखित है:

1. Requirement Analysis (आवश्यकता विश्लेषण): यह SDLC का first phase है जिसमें customer से सभी necessary information collect की जाती है ताकि हमें उनकी expectations के अनुसार s/w develop करने में मदद मिले।

इसके अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण सवाल जो हमारे द्वारा customer से पूछे जाते है, जैसे आपका end user कौन होगा, उस s/w का भविष्य में scope क्या है, आदि पर discussion किया जाता है।

इस phase में हमारा उद्देश्य ये होता है कि हम customer की प्रत्येक requirement को अच्छे से जान ले ताकि हम ये समझ पाए कि हमें क्या develop करना है।

2. Planning (योजना बनाना): इस phase में यह discuss किया जाता है कि s/w को बनाने में cost क्या आएगी और उससे हमें क्या benefit होगा। क्योंकि अगर उस s/w को बनाने से हमें कोई profit नही हुआ तो हम उसे बनाएंगे ही क्यों। अगर s/w बनाने में cost बहुत high होगी तो हमें loss का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए s/w को design करने से पहले planning बेहद महत्वपूर्ण हैं। जिसके बाद आप यह तय कर पाते है कि आपको उस project को accept करना चाहिये, कुछ modifications के साथ accept करना चाहिये, या फिर reject कर देना चाहिये।

इस phase में आप यह measure करते है कि यह project आपके लिए कितना beneficial होगा।

3. Designing: इस phase के अंदर architects उस software की logical designing पर काम करना शुरू करते है। इस phase में SRS (System requirement specification) document बनाया जाता है जिसमे सभी logical details होती है जैसे कि s/w कैसा दिखेगा, किस programming language का उपयोग किया जाएगा, database design, modular design आदि।

यह चरण final product का एक prototype प्रदान करता है। मूल रूप से इसमें उन सभी चीजों का डिजाइन शामिल होता है जिन्हें code किया जाना हैं।

4. Coding: s/w का design तैयार हो जाने के बाद developers द्वारा programming language का उपयोग करके उस design की coding शुरू की जाती है। अर्थात जो भी हमनें design phase में सोचा कि s/w का interface कैसा होगा, उसकी internal working कैसी होगी ये सब coding phase में implement किया जाता है।

इसके लिए कई developers द्वारा modules को code किया जाता है और फिर सभी modules को एक साथ arranged किया जाता है ताकि वह efficiently काम कर पाए। यह SDLC process का सबसे longest phase होता हैं।

5. Testing (परीक्षण): जब एक बार पूरा s/w develop हो जाता है तो इसे testers के पास भेजा जाता है। testing team पूरे system की functionality को test करती है। इस phase में ये check किया जाता है कि कहीं s/w में bug और errors तो नहीं हैं।

Testing इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे यह verify होता है कि सॉफ्टवेयर ग्राहकों की आवश्कताओं के अनुसार काम कर रहा है या नहीं।

6. Deployment (तैनाती): software की overall testing के बाद और यह जांचने के बाद कि यह bug free है, s/w को launch किया जाता है। जिसके बाद यह users के उपयोग करने के लिए available होता है।

अगर s/w के deployment के बाद भी यदि कोई bug या errors पाए जाते है तो maintenance team द्वारा s/w को re-evaluated किया जाता है और फिर इसे new version के साथ फिर से re-deployed किया जाता है।

7. Maintenance (रखरखाव): maintenance team द्वारा s/w usage और users के feedbacks को देखा जाता है। Software की bug fixing, upgrade और enhancement को maintenance team द्वारा देखा जाता हैं।

Maintenance आवश्यक है system की working life के दौरान आने वाले errors को eliminate करने के लिये ताकि software हमेशा बढ़िया काम करता रहे।

Types of SDLC Models in Hindi (SDLC मॉडल्स के प्रकार)

बुनयादी Software development life cycle की अवधारणा का उपयोग करते हुए सॉफ्टवेयर विकास प्रकिया में सफलता सुनिश्चित करने के लिये कुछ models बनाये गए थे। जिन्हें हम Software Development Process Models भी कहते है।

चूंकि प्रत्येक विकसित सॉफ्टवेयर अलग होता है तो इसके लिये हमें एक उपयुक्त SDLC models को follow करने की आवश्यकता होती है।

कुछ सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय SDLC models है:

Conclusion (संक्षेप में)

क्या है SDLC? software development life cycle किसी भी s/w को develop करने के लिये phases या steps के sequence को describe करता है।

तो उम्मीद है, इस लेख What is SDLC in Hindi को पढ़ने के बाद आपके इस विषय से सम्बंधित सभी शंकाये दूर हो गयी होगी। लेख से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो कृपया हमें कमेंट के माध्यम से बताएं।

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2 thoughts on “SDLC in Hindi | Software Development Life Cycle”

  1. sir apane bahot acche se yah blog me samajaya hai very nice blog aur very useful hai yah blog padhane ke badh bahot logoko bahot fayada hone wala hai.

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