IC (Integrated Circuit) क्या है, इसके कार्य और प्रकार।

अगर आप Electronics के स्टूडेंट है, तो आपने Integrated Circuit अथवा IC के बारे में जरूर सुना होगा। इसे दूसरे नामों जैसे – “Chip” और “Microchip” से भी संदर्भित किया जाता है। इस पोस्ट में हम IC क्या है? इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कि मोबाइल फोन, लैपटॉप, रेफ्रिजरेटर, कंप्यूटर, टीवी और अन्य सभी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में IC का क्या काम होता है? ये जानेगें।

इंटीग्रेटेड सर्किट क्या है? (What is IC in Hindi)

IC अथवा Integrated Circuit एक small chip है, जो अर्धचालक सामग्री (semiconductor material) आमतौर पर silicon से बनी होती है। इस छोटी चिप में कई सारे इलेक्ट्रॉनिक घटक जैसे – transistors, capacitors, diodes और resistors को एक तार (conducting wire) की मदद से आपस मे जोड़ा गया होता है।

एकीकृत सर्किट (IC) के अविष्कार के कारण ही मोर्डन जमाने के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विकास संभव हो सका है। क्या आपने ENIAC computer के बारे में सुना है, ये 1940 के दशक में उपयोग होता था। इसका आकार बहुत बड़ा था। ये एक 50 फुट लंबे रूम में आता था और इसका वजन लगभग 30 टन था।

पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आकार में बड़े इसलिये थे क्योंकि वे आज इस्तेमाल किये गए Integrated circuit के बजाए उनके स्विचिंग कॉम्पोनेन्ट जैसे – vacuum tubes और transistors के लिए सामान्य सर्किट (discrete circuit) का उपयोग करते थे। ये सर्किट सिर्फ सिंगल कॉम्पोनेन्ट के लिये होते है।

जबकि IC में हजारों से लेकर लाखों छोटे ट्रांजिस्टर, रजिस्टर और कैपेसिटर को एक chip में गढ़ दिया जाता है। कई इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट को एक सिंगल यूनिट में शामिल कर देने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आकार को कम करने में मदद मिली।

सम्बंधित पोस्ट: कंप्यूटर की पावर सप्लाई यूनिट

Integrated Circuit (IC) से सम्बंधित प्रमुख बिंदू:

  • IC एक amplifier, oscillator, timer, microprocessor यहां तक कि एक computer memory की तरह कार्य कर सकती है।
  • ये एक छोटी Monolithic chip है, जिसका आकार कुछ वर्ग सेंटीमीटर या कुछ वर्ग मिलीमीटर होता है।
  • सन 1959 में Robert Noyce ने फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर इंटरनेशनल कंपनी में पहली IC chip का निर्माण किया।
  • IC chip के छोटे आकार, हल्के वजन और कम बिजली की खपत के कारण इंजीनियर विभिन्न प्रकार के Microelectronic उपकरणों का निर्माण कर पाए है।
  • ये सर्किट सभी छोटे-बड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिये उपयोग होती है। अपने टीवी, फोन या रेडियो के अंदर मौजूद circuit board (PCB) में आपको वर्ग के आकार में काली रंग की कई छोटी chips दिखाई देंगी ये सब ICs है।

IC के अविष्कार ने कंप्यूटर डिजाइन को कैसे बदला

अभी हमने आपको ENIAC computer और उसके आकार के बारे में बताया था। ये आधुनिक कंप्यूटर से लगभग 100 गुना अधिक बड़ा था। परन्तु आज के कंप्यूटर के मुकाबले ENIAC की कार्यक्षमता कुछ भी नही है। तो यदि हम कंप्यूटर के इतिहास को देखे तो तब से अब तक उसके डिज़ाइन में लगातार कमी आयी है वही उसकी कार्यक्षमता निरन्तर बड़ी है।

तो ये सब एकिकृत सर्किट के आने के बाद ही सम्भव हो सका है। क्योंकि पुराने कंप्यूटर में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट आकार में काफी बड़े होते थे। लेकिन 1958 में जब IC को कंप्यूटर में उपयोग किया जाने लगा तब से कंप्यूटर के आकार और लागत दोनों में कमी आयी है।

Microchip टेक्नोलॉजी के आगमन ने, न सिर्फ कंप्यूटर का डिज़ाइन बदला बल्कि पूरे इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को बढ़ावा दिया। इसके अलावा मोबाइल फोन, टीवी, डिजिटल वॉच व ऐसे ही कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण सम्भव हो सका।

Integrated circuit को बनाने के पीछे का उद्देश्य ये था कि कंप्यूटर के सभी इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट के बीच कनेक्शन स्थापित करके उन्हें सिंगल सर्किट में ला देना। हालांकि शुरुआत में एकीकृत सर्किट आज के जितना कुशल नही थी परन्तु इसमें लगातार समय के साथ सुधार होते रहे। इसी कारण हम Microelectronic gadgets का निर्माण भी कर पाए।

सम्बंधित पोस्ट: हार्डवेयर की बेसिक जानकारी

आईसी चिप की जनरेशन

आज के मुकाबले शुरुवाती IC chips में हजारों या लाखों इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट एकीकृत नही होते थे। बल्कि पहली Integrated circuit में कुछ ही transistors को एकीकृत किया गया था। परन्तु Metal oxide semiconductor (MOS) तकनीक जैसे-जैसे आगे बढ़ी एक single chip में एकीकृत किये जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट की संख्या भी तेजी से बढ़ी। आइए एक-एक करके ICs की शुरुआत से लेकर अब तक यात्रा पे नजर डाले।

Small-Scale Integration (SSI)

शुरुवाती Integrated Circuit में केवल कुछ ही ट्रांसिस्टर होते थे इसलिये इसे Small-Scale Integration कहा गया। इन ICs में 100 से भी कम transistors और कुछ ही logic gates एकीकृत होते थे। उदाहरण के लिये शुरूवाती linear ICs जैसे- Plessey SL201 या Philips TAA320 में कुछ दो ट्रांसिस्टर थे। शुरूवाती Aerospace projects में इन सर्किटों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

Medium-Scale Integration (MSI)

सन 1960 के आते-आते Integrated Circuit में एक बड़ा बदलाव आया। अब प्रत्येक chip में सैकड़ों ट्रांजिस्टर को एकीकृत किया जा सकता था। इसे Medium-Scale Integration नाम दिया गया। इस प्रकार की IC के विकसित होने से circuit board के आकार को कम किया जा सका।

चूंकि एक सिंगल चिप में कई सारे इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट एकीकृत कर दिए गए इस कारण कॉम्पोनेन्ट को अलग से असेम्बल करने का काम कम हो गया। ये सब MOSFET स्केलिंग तकनीक की वजह से सम्भव हो सका जिसने उच्च घनत्व वाले chips को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।

Large-Scale Integration (LSI)

IC की कार्यक्षमता बढ़ाने और उसकी लागत को कम करने के उद्देश्य के कारण 1970 तक MOS chips में कई हजारों इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट और 100 से अधिक gates को एकीकृत किया जा सकता था। इस एकीकरण को Large-Scale Integration नाम दिया गया।

एक सिंगल silicone wafer (IC) में एम्बेडेड किये जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट की संख्या को लगातार बढ़ाने से जटिल सर्किट जैसे- microprocessor का निर्माण हुआ।

Very-Large Scale Integration (VLSI)

आगे भी सिंगल chips में एकीकृत किये गए इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट की संख्या में लगातार बढ़ोतरी आती गयी और अंत मे संख्या सैकड़ो से अरबों कॉम्पोनेन्ट प्रति चिप पहुंच गई। VLSI circuit के विकसित होने से सबसे बड़ा लाभ ये हुआ कि अब संपूर्ण कंप्यूटिंग सिस्टम को एक सिंगल चिप में बदला जा सका।

ऐसे सम्पूर्ण कंप्यूटिंग सिस्टम को System-on-Chip (SoC) कहा जाता है। इसके बाद सन 1986 में पहली 1 megabit RAM (मेमोरी में bit और byte का मतलब) पेश की गई, जिसमे एक मिलियन से अधिक ट्रांजिस्टर एकीकृत किये गए थे। इसके अलावा VLSI तकनीक microchip processor को बनाने में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती है।

Ultra-Large Scale Integration (ULSI)

ULSI तकनीक को और अधिक जटिल सिस्टम बनाने के लिये विकसित किया था। इसके तहत बिलियन ट्रांसिस्टर्स और सैकड़ो logic gates एक सिंगल microchip में एम्बेडेड किये गए। ULSI circuit के विकसित होने के बाद और बेहतर कंप्यूटर प्रोसेसर माइक्रोचिप बनाने में मदद मिली।

सम्बंधित पोस्ट: यूपीएस और उसका कार्य क्या है?

Integrated Circuit (IC) के प्रकार

IC kya hai and its types in hindi

ICs को विभिन्न मापदंडों के आधार पर अलग-अलग श्रेणी में बांटा जाता है। परन्तु इसके मुख्य तीन टाइप इस प्रकार है:

Analog ICs

इस प्रकार की ICs में इनपुट और आउटपुट सिग्नल निरंतर श्रेणी में काम करते है। Analog या Linear IC सबसे सरल प्रकार की सर्किट है। क्योंकि इन circuit में कुछ ही कॉम्पोनेन्ट का उपयोग होता है। उदाहरण के लिये एक microphone जो ध्वनि तरंगों (sound waves) को विद्युत ऊर्जा (electrical energy) संक्षेप में ऑडियो सिग्नल में बदल देता है।

आमतौर पर Analog ICs उन डिवाइस से जुड़े होते है, जो वातावरण से सिग्नल लेते है या वापस वातावरण को सिग्नल भेजते है। Audio frequency amplifier और radio frequency amplifier भी इसके अच्छे उदाहरण है।

Digital ICs

ये IC इलेक्ट्रिक सिग्नल के सभी आयामों में संचालित होने के बजाए दो परिभाषित लेवल पर संचालित होती है। ये circuit कई digital gates, multiplexers, flip flops और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट के उपयोग से तैयार की जाती है। जो सर्किट सिग्नल को दो स्टेट में परिभाषित करती है, उसे binary circuit कहा जाता है।

इलेक्ट्रिक सिग्नल की ये दो स्टेट ‘0’ और ‘1’ है। सामान्य रूप डिजिटल सर्किट में 0 को ‘on’ वही 1 को ‘off’ का प्रतिनिधि माना जाता है। Digital ICs को लॉजिकल ऑपरेशन और डिजिटल गणना के लिये उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर नेटवर्क।

Mixed Single ICs

इन सर्किट में Digital और Analog ICs दोनों को एक ही chip में संयोजित कर दिया जाता है। ये डिजिटल से एनालॉग कन्वर्टर (D/A converter) और एनालॉग से डिजिटल कन्वर्टर (A/C converter) और क्लॉक/ टाइमिंग आईसी की तरह काम करती है।

सम्बंधित पोस्ट: CPU क्या होता है

IC की विशेषताएं

Integrated Circuit की कई विशेषताओं के चलते ही electronics के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण अविष्कार था। आइये इसकी प्रमुख विशेषताएं क्या है जाने:

1. पुराने सर्किट के मुकाबले आकार में कई गुना छोटी होती है। इसके विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट को सिंगल chip में एकीकृत कर दिया जाता है।

2. सर्किट का आकार छोटा होने के कारण वजन भी काफी हल्का होता है।

3. सैकड़ो समान chips को एक छोटे semiconductor wafer में एक साथ बनाने से प्रति चीप की लागत कम हो जाती है।

4. Parasitic capacitance effect की अनुपस्थिति के कारण ऑपरेटिंग स्पीड में व्रद्धि हुई है।

5. इन chips को आसानी से बदला जा सकता है, लेकिन खराब होने पर इसकी मरम्मत नही की जा सकती।

6. Integrated Circuit के छोटे आकार के कारण ये बिजली की कम खपत करते है।

7. IC chips की गुणवत्ता बेहतर होती है, क्योंकि इसमें कोई soldered joints नही होता है।

8. स्ट्रे इलेक्ट्रिक पिकअप की कोई संभावना न होने के कारण ये chips स्माल सिग्नल ऑपरेशन के लिये उपयुक्त है।

संक्षेप में

अलग-अलग निर्मित इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट जैसे- ट्रांसिस्टर, कैपिसीटर, डायोड और रजिस्टर को अगर किसी वायर या printed circuit board के उपयोग से आपस मे जोड़कर एक circuit बना दिया जाए तो उसे हम सामान्य सर्किट या discrete circuit कहते है।

परन्तु इस सर्किट के कई नुकसान है, उदाहरण के लिए एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में उपयोग होने वाले कॉम्पोनेन्ट की संख्या अधिक होती है, जिसके कारण प्रत्येक कॉम्पोनेन्ट को अलग-अलग सर्किट में एम्बेडेड करके आपस में जोड़ने से वो बहुत स्थान लेते है। यही कारण है कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आकार में बहुत बड़े होते थे।

इसके विपरीत Integrated circuit इस उद्देश्य पर आधारित है, कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग होने वाली Active devices (जैसे- डायोड व ट्रांसिस्टर) और Passive devices (जैसे- रजिस्टर व कैपिसिटर) को एक वायर की मदद से आपस मे जोड़कर एक छोटी silicone chip में गढ़ दिया जाए।

अब क्योंकि हम एक छोटी चिप में कई हज़ारों कॉम्पोनेन्ट शामिल कर सकते है। ये ही कारण है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में IC के इस्तेमाल के बाद उनके आकार में कई सौ गुना गिरावट आयी। इसके अलावा उनकी प्रोसेसिंग क्षमता में भी हज़ारों गुना बढ़ोतरी हुई।

तो उम्मीद है, इस पोस्ट IC क्या है? से आप Integrated Circuit के बारे में जान गए होंगे। यदि आपका पोस्ट से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो कृपया कमेंट में जरूर बताये। पोस्ट ज्ञानवर्धक लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना बिल्कुल न भूले।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here