Computer क्या है? Computer की परिभाषा व इसके प्रकार हिंदी में

नमस्कार दोस्तो NayaSeekhon में आपका स्वागत है। आज हम जानेंगे Computer क्या है इसका अविष्कार कब और कैसे हुआ? मुझे उम्मीद है, शायद ही दुनिया मे कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने अब तक Computer शब्द का नाम नही सुना हो। आप भी Computer के बारे में सारी जानकारी रखते होंगे पर क्या आप इस नायाब Electronic machine को सिर्फ घर और दफ्तर में इस्तेमाल होने वाले एक Computer की तरह देखते है। हो सकता है, आपके लिए कंप्यूटर शब्द की परिभाषा बहुत छोटी हो परन्तु एक बात में आपको बता देना चाहता हूं कि कंप्यूटर सिर्फ एक Device नही है, बल्कि यह आज की mordern technology को विकसित करने वाली एक जादुई मणि की तरह है।

computer kya hai in hindi

जरा सोचिये आज आप घर बैठे दूसरे देश मे किसी व्यक्ति से mobile के जरिये सम्पर्क कर लेते है। अपनी इच्छानुसार television पर कोई भी कार्यक्रम देख लेते है। एक simple से कार्ड से कही भी पैसे निकाल लेते है। अब तो आपको Shopping करने के लिये बाहर भी नही जाना पड़ता। इतनी सुविधाए किसकी वजह से सम्भव हो सकी है और आगे भी कितना कुछ असंभव सम्भव होने वाला है, यह कोई नही जानता।

तो अगर आप सोचते है Computer कोई जानने योग्य चीज नही तो आप बिलकुल गलत है। मै आपको विश्वास दिलाता हूँ अगर आप Computer क्या है बारीकी से समझ ले तो आपके लिये आज की technology को समझते देर नही लगेगी। ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि टेक्नोलॉजी के स्तर पर जितना भी विकास हुआ है। वो सब इसी machine के ऊपर किये गये प्रयोगों के परिणाम है।

शायद अब आप समझ गये होंगे कि में एक device के बारे में नही बताने वाला हूं बल्कि असल मे Computer किसे कहते है? इसकी पूरी जानकारी देंने वाला हूँ। अगर आप एक IT Student है तो आपके लिए यह पोस्ट बहुत ज्ञानवर्धक रहेगी। तो चलिये इस पोस्ट को शुरू करते है और जानते है Computer क्या है?

Computer क्या है? (What is Computer in Hindi)

Computer क्या है? साधारण शब्दो मे “Computer” एक Electronic device है, जो विभिन्न प्रकार के Arithmetic और logical task को पूर्ण करता है। कंप्यूटर विभिन्न प्रकार के instructions का प्रयोग करके कई प्रकार के data को उचित रूप से व्यवस्थित करता है। अगर इसी को आसान शब्दो मे समझाना हो तो कंप्यूटर एक ऐसा electronic device है, जो किसी यूजर से input को प्राप्त करता है फिर उस input के आधार पर processing करता है और collected result को output के रूप में प्रदान करता है।

Computer के एक तरह से काम करने के लिए अलग – अलग computer program बनाये जाते है। आज जितनी भी जगह कंप्यूटर का उपयोग होता है जैसे industrial और customer device के लिये तथा आपके पास उपलब्ध सभी technical device यहां तक कि दुनिया के सभी development व productive work जो कंप्यूटर के द्वारा किये जाते है। उनके काम करने के लिये एक खास तरह की programing की जाती है।

शुरूवाती computers को केवल calculating device के रूप में पहचाना जाता था। यह simple manual device जनगणना करने में हमारी मदद करते थे। परंतु बीते कुछ समय मे इस क्षेत्र में काफी विकास हुआ जिसके कारण आज एक Computer को आप इस रूप में देख पाते है।

अगर आप यह समझना चाहते है कि एक calculating device आज का mordern computer कैसे बना। तो इसके लिये आपको Computer के इतिहास को पढ़ना होगा इससे आपको आज के कंप्यूटर के बारे में और गहराई से जानने को मिलेगा।

कंप्यूटर का इतिहास

किताबो के हिसाब से Computer का इतिहास लगभग 1940 से शुरू हुआ परन्तु अगर आप इसे आज कि hitech machine न समझकर मात्र एक computer machine समझे तो इसका इतिहास लगभग 3000 साल पुराना है। शायद आप मे बहुत लोग इतने पुराने इतिहास को जानने के इच्छुक नही होंगे परन्तु सच्चाई यह है, बिना समझे कि एक साधारण मशीन आज का कंप्यूटर कैसे बना Computer क्या है जानना अधूरा है।

कंप्यूटर का इतिहास शुरू होता है जब अबेकस (Abacus) का विकास हुआ था। यह एक mechanical device है। अबेकस से जोड़ने, घटने, गुणा करने और भाग देने जैसे कार्य आसानी से किये जाते थे। 1645 में इसी उपकरण को देखते हुये France के एक Mathematician जिनका नाम Blaise paskal था उन्होंने एक Mechanical digital calculator का अविष्कार किया जिसे पास्कलाइन Pascline नाम दिया गया। यह मशीन केवल जोड़ने और घटाने का काम ही कर सकती थी। यह तकनीक आज गाड़ियों के odometer में भी उपयोग की जाती है। इस मशीन को Adding machine भी कहा जाता है।

Computer के विकास को एक उड़ान तब मिली जब 1801 में Joseph Marie Jacquard जो एक फ्रांसीसी बुनकर थे उन्होंने एक ऐसे loom का अविष्कार किया जिसकी मदद से कपड़ो में अलग-अलग Pattern के design किये जा सकते थे। इसकी खास बात यह थी कि कपड़ो में design करने के लिए इसे किसी बाहरी मदद की आवश्यकता नही होती थी। यह खुद ही कपड़ो को पैटर्न देता था। ये सभी पैटर्न कार्डबोर्ड (Cardboard) के पंचकार्ड (Punch cards) से नियंत्रित होते थे।

इसी पंचकार्ड के model को देखकर computer के विकास में काफी सहायता मिली। इससे यह निष्कर्ष निकला की किसी सूचना को पंचकार्ड जैसी device में store किया जा सकता है तथा इनका प्रयोग किसी कार्यो को करने के लिए instructions के रूप में भी किया जा सकता है।

कंप्यूटर इतिहास का सबसे बेहतर युग तब आया जब अंग्रेजी गणितज्ञ (English mathematician) को हाथों से बनाई गई सारणियों के आधार पर गणना करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इन परेशानियों का हल निकालने के लिए 1882 में Charles Babbage ने एक यांत्रिक Calculation machine का निर्माण किया। इस मशीन का नाम Analytical engine रखा गया।

यह powerful machine कई गणनाएं करने में सक्षम थी। यह सूचना को पंचकार्ड में store भी कर सकती थी तथा उनमें store सूचना के आधार पर कार्य भी करती थी। यह Analytical engine मशीन ही mordern computer का मूल बना। अब अगर आपका सवाल है, Computer का जनक किसे कहा जाता है? तो जवाब है Charles Babbage. अपने इसी अविष्कार की वजह से इनको Father of Computer भी कहा गया।

हालांकि शुरुवात में लोगो ने इस मशीन को किसी काम का नही माना। लेकिन Ada Augusta जो प्रसिद्ध कवि Lord Byron की बेटी थी उन्होंने Charles Babbage का साथ दिया और Computer विकास में उनकी मदद की। इनको विज्ञान जगत की पहली Computer programmer भी कहा जाता है। programing language ‘एडा’ (Ada) भी इनके नाम पर ही रखी गयी है।

कंप्यूटर के विकास में एक अहम मोड़ तब आया जब 1840 के दशक में अमेरिकी जनगणना करने के लिये Herman Hellerith जो एक अमेरिकी शिक्षक थे उन्होंने एक Tabulating machine की स्थापना की। यह मशीन गणना करने में बहुत तेज थी। Hellerith की यह मशीन punch cards को electricity द्वारा operate करती थी। मशीन के लिए बनाये गए mordern punch cards को बाद में पण्टेन्ट करवाया गया और 1896 में Tabulating machine company की स्थापना हुई।

1940 तक Electro mechanical computing काफी विकसित हो चुका था। 1944 में Howard Aiken ने I.B.M Scientist के साथ मिलकर विश्व के पहले Electro mechanical computer का निर्माण किया। जिसका नाम Automatic Sequence Controlled Calculator रखा गया। इसके बनने के बाद इसे Howard university ले जा गया जहाँ इसका नाम पड़ा मार्क-1 (Mark-1) इस कंप्यूटर का कुल वजन 4500 किलोग्राम था। इसकी क्षमता 6 सेकंड में 1 गुणा व 12 सेकंड में 1 भाग करने की थी। इसके बाद इसमे लगातार प्रयोग किये गए।

अंततः 1937 व 1942 के बीच John Vincent Atanasoff और Clifford Berry ने विश्व के पहले डिजिटल कंप्यूटर (First Digital Computer) का निर्माण किया और इसे नाम दिया एटनासॉफ-बेरी कंप्यूटर (Atanasoff-Berry Computer) हालांकि इस कंप्यूटर को ज्यादा प्रसिद्धि नही मिली तथा 1960 में इसे फिर से नये रूप में लांच किया। यह कंप्यूटर का वह इतिहास है जिसके बारे में ज्यादा बात नही की जाती। लेकिन एक कंप्यूटर को इतना सम्पूर्ण बनाने में इन्ही लोगो का सबसे बड़ा हाथ है।

अब इसके बाद शुरुवात होती है, Computer के सबसे तेजी से होने वाले विकास की जिसे हम कंप्यूटर की पीढ़िया (Generation of Computer) भी कहते है। तो चलिये देखते है किस पीढ़ी के कंप्यूटर में क्या खास था।

कंप्यूटर की पीढ़ियां

प्रथम पीढ़ी (First Generation) : 1946 – 1956

प्रथम पीढ़ी की शुरुवात 1946 से हुई जब John Mouchly व Eckent ने प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर एनियक (ENIAC) का विकास किया। इस कंप्यूटर में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum tubes) का इस्तेमाल किया जाता था। प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर पंचकार्डस पर आधारित थे। इनमे मेमोरी के लिए Magnetic drum का इस्तेमाल होता था। programing के लिए सिर्फ Machine language और Assembly language का इस्तेमाल किया जा सकता था। Computers को ठंडा करने के लिए कई Air conditioners का प्रयोग होता था। यह size में काफी बड़े होते थे। इनके एक Cubic feet में 1000 Circuit होते थे। प्रथम पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर ENIAC, EDVAC, UNIVAC, IBM इत्यादि।

द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) : 1956 – 1964

द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर में Vacuum tubes के बदले Transistor का प्रयोग होने लगा। इनमे Storage device, printer और operating system का इस्तेमाल होने लगा था। यह प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर के मुकाबले काफी छोटे थे तथा सस्ते व रखरखाव में भी कम खर्च करना पड़ता था। उच्चस्तरीय कोबोल (Cobol) व फोरर्ट्रान (Fortran) जैसी language का इस्तेमाल होना शुरू हुआ। अब एक Cubic feet में 1 लाख Circuit हुए। द्वितीय पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर IBM, CDC UNIVAC इत्यादि।

तृतीय पीढ़ी (Third Generation) : 1964 – 1971

तृतीय पीढ़ी पिछली दोनों पीढ़ियों से ज्यादा बेहतर थी। क्योंकि यहां आई.सी (Integrated circuit) का विकास हुआ। आई.सी (I.C) ने computer के आकार को काफी कम कर दिया। अब कम्प्यूटर बहुत कम गर्म होते थे। Third generation के कंप्यूटर में Remote processing, time sharing, multiprogramming operation system का प्रयोग किया जाने लगा। इस पीढ़ी के दौरान उच्चस्तरीय भाषाओ Fortran, Cobol और pascal आदि का उपयोग किया गया। इस पीढ़ी में 1 वर्गफुट में करीब 1 करोड़ सर्किट थे। तृतीय पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर  IBM, Honey Well, PDP, TDC इत्यादि।

चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation) : 1971 – 1980

चतुर्थ पीढ़ी जो 1971 से शुरू हुई इन computers ने बहुत बड़े पैमाने पर एकीकृत सर्किट (VLSI) का इस्तेमाल किया। VLSI Circuit में एक ही चिप पर जुड़ी सर्किट के साथ लगभग 5000 transistor और अन्य सर्किट तत्व होते थे। इससे चतुर्थ पीढ़ी में Micro Computer का होना संभव हो सका। इस पीढ़ी के कंप्यूटर पिछली पीढ़ी की तुलना में अधिक powerful, compact, reliable और affordable हो गए। Fourth Generation ने ही हमे पर्सनल कंप्यूटर  (personal computer) दिया।

इस पीढ़ी में C, C++, D Base इत्यादी उच्चस्तरीय भाषाओ का उपयोग किया गया। अब इसके एक वर्गफीट में अरबो सर्किट आ गए। इस पीढ़ी में  Time sharing, Real time network, oprating system का उपयोग किया जाने लगा। चतुर्थ पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर DEC 10, STAR 1000, PDP 11, CRAY-1, CRAY-X-MP इत्यादि।

पंचम पीढ़ी (Fifth Generation) : 1980 से अभी तक

पंचम पीढ़ी की शुरुवात 1980 से अभी तक जारी है। इस पीढ़ी में VLSI Technology को ULSI ( Ultra large scale integration) में बदल दिया गया है। यह पीढ़ी Parallel processing hardware और Artificial intelligence (AI) पर आधारित है। इसका मकसद है कि computer किसी मुश्किल का हल इंसानों की तरह सोचकर खुद निकाले । इस पीढ़ी के कंप्यूटर आकार में काफी छोटे हो गये है। इस पीढ़ी में सभी उच्चस्तरीय भाषाओ जैसे C और C++, Java, .Net आदि का उपयोग किया जाता है। पंचम पीढ़ी के कुछ कंप्यूटर Desktop, Laptop, Notebook, Ultrabook, Chromebook इत्यादि।

भारत मे कंप्यूटर युग की शुरुवात

हमारे देश भारत मे कंप्यूटर युग की शुरुवात 1952 में हुई। जब भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) ने एक Analog Computer की स्थापना की थी। भारत ने इसके बाद अपना प्रथम Digital Computer HEC – 2M को 1956 में स्थापित किया जिसके बाद कंप्यूटर तकनीक को अपनाने वाला भारत एशिया का दूसरा देश बन गया। 1958 में ISI में एक अन्य कंप्यूटर URAL स्थापित किया गया। इसके बाद भारत Computer की नई तकनीकों को अपनाता चला गया। आज इसी की बदौलत भारत एक विकासील देश है।

कंप्यूटरों के प्रकार (Types of Computer in hindi)

Computer को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में विभाजित किया गया है।

  • कार्यप्रणाली (Machanism)
  • उद्देश्य (Purpose)
  • आकार (Size)

कार्यप्रणाली पर आधारित कंप्यूटर (Computer based on Machanism)

एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer)

एनालॉग कंप्यूटर वह कंप्यूटर होता है, जिसका उपयोग लगातार अलग-अलग data को process करने के लिए किया जाता है। डाटा की इस परिवर्तनशील निरन्तर धारा को Analog data कहा जाता है। Analog Computer का उपयोग Scientific और Industrial Applications जैसे दाब, तापमान, लंबाई आदि मापने में किया जाता है। इसके उदाहरण temperature, telephone lines, speedometer, pressure इत्यादि है।

डिजिटल कंप्यूटर (Digital Computer)

डिजिटल कंप्यूटर वे होते है, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर Binary number system का उपयोग करके मात्राओं के साथ डाटा की गणना करने के लिए किया जाता है। इन कंप्यूटर से प्राप्त परिणाम बहुत सटीक होते है। Digital Computer का उदाहरण Mackbook, electronic odometer है।

हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer)

यह कंप्यूटर एनालॉग व डिजिटल कंप्यूटरों का मिला जुला रूप है। इसका एनालॉग भाग समीकरणों में तुलना करके परिणाम प्रदर्शित करता है। जबकि डिजिटल भाग तार्किक गणनाएं (Logical calculation) करता है और परिणाम प्रदान करता है तथा नियंत्रक के रूप में काम करता है।

उद्देश्य पर आधारित कंप्यूटर ( Computer based on Purpose)

सामान्य उद्देशीय कंप्यूटर (General Purpose Computer)

एक सामान्य उद्देश्य वाला कंप्यूटर वह है, जो उपयुक्त एप्लीकेशन और आवश्यक समय को देखते हुए अधिकांश Simple computing task को करने में सक्षम होगा। Personal computer जिनमे Desktop, Notebook, Smartphone और Tablet शामिल है, General Purpose Computer के उदाहरण है।

विशिष्ट उद्देशीय कंप्यूटर (Special Purpose Computer)

वे कंप्यूटर जो किसी special purpose के लिए बनाए गए थे। इनमे Naviar- stokes hydrodynanic solvers, Classic molecular और Ising model computer शामिल है। इन कंप्यूटर का अधिकांश समय किसी एक समस्या का हल करने ले लिए होता है। इन्हें dedicated computer भी कहा जाता है क्योंकि वे एक ही कार्य को बार – बार करने के लिए समर्पित होते है।

आकार पर आधारित कंप्यूटर ( Computer Based on Size)

माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer)

माइक्रो कंप्यूटर की श्रेणी में वे कंप्यूटर आते है जिनका उपयोग हम अपने जीवन मे सबसे ज्यादा करते है। Micro Computer के कुछ उदाहरण Desktop, Notebook और Laptop इत्यादि है। क्योंकि ये आकार में बाकी सभी catagory के कंप्यूटरों से काफी छोटे होते है। इसलिए इन्हें माइक्रो कंप्यूटर नाम दिया गया। तकनीक की दुनिया मे micro processor एक क्रांतिकारी अविष्कार था।

वर्कस्टेशन (Workstation)

वर्कस्टेशन व माइक्रो कंप्यूटर लगभग आकार और दिखने में एक जैसे ही होते है। लेकिन Workstation माइक्रो कंप्यूटर की तुलना में most powerful होते है। इस प्रकार के कंप्यूटरों का उपयोग कुछ विशेष जटिल कार्यो को पूरा करने के लिए किया जाता है। जैसे Animation, Scientific research, Engineering इत्यादि।

मिनी कंप्यूटर (Mini Computer)

मिनी कंप्यूटर एक Multi user computer system है। जिसका इस्तेमाल किसी कंपनी में कई वर्करों के एक साथ काम करने के लिए किया जाता है। इन Computers में एक बड़े कंप्यूटर की अधिकांश विशेषताएं और क्षमताएं होती है। लेकिन यह आकार में उनसे छोटे होते है।

मेनफ़्रेम कंप्यूटर (Main Frame Computer)

मेनफ्रेम कंप्यूटर वे कंप्यूटर्स होते है, जो आम तौर पर अपने बड़े आकार, ज्यादा storage, processing power और उच्च स्तर की विश्वनीयता के लिए जाने जाते है। इनका इस्तेमाल वो कंपनियां करती है, जिन्हें Data processing के लिए उच्च संस्करणों की आवश्यकता होती है। Main frame computers कई oprating system को host करने की क्षमता रखते है। ये भी multi user वातावरण का समर्थन करते है जिस वजह से एक बार मे 100 से ज्यादा user इसका प्रयोग कर सकते है।

सुपर कंप्यूटर (Super Computer)

एक सुपर कंप्यूटर में Massive Computing Power प्राप्त करने के लिए Architecture resources और Components होते है। आज के Super computer में हजारो processor होते है जो प्रति सेकंड अरबो – खरबो calculation करने में सक्षम होते है। सुपर कंप्यूटर बाकी सभी श्रेणियों के कंप्यूटर से सबसे बड़े होते है। इन Computer का प्रयोग मौसम की भविष्यवाणी या सेटेलाइट के प्रयोग के लिए किया जाता है। आकार में बहुत बड़े और सबसे शक्तिशाली होने के कारण इनकी कीमत भी बहुत ज्यादा होती है। इसलिये इनका इस्तेमाल अंतराष्ट्रीय कंपनियां ही करती है।

कंप्यूटर के भाग (Component of computer system in hindi)

एक Computer के काम करने के पीछे उसके कई components का हाथ होता है। जैसे Input Devices, Output Devices, Storage Devices तथा Central Processing Unit इत्यादि। तो चलिए जानते है, एक कंप्यूटर के लिए उसके कौन-कौन से component आवश्यक है।

इनपुट डिवाइस (Input Device)

इनपुट डिवाइस कोई भी हार्डवेयर डिवाइस (Hardware device) है। इसका काम computer को data भेजना होता है। उदाहरण के तौर पर हम keyboard के इस्तेमाल से शब्दो को कंप्यूटर में type करते है। तो यहां हम keyboard का इस्तेमाल एक Input device के रूप में कर रहे है। कुछ मुख्य  Input device जो नीचे बतायी गयी है।

Keyboard
Mouse
Touchpad
Remote
Scanner
Joystick
Track ball
Microphone

आउटपुट डिवाइस (Output Device)

आउटपुट डिवाइस कोई भी परिधीय (Peripheral) है। जो कंप्यूटर से data को receive करती है, और यूजर के समक्ष प्रदर्शित करने का कार्य करती है। उदाहरण के लिए Monitor एक output device है जो कंप्यूटर से प्राप्त किसी भी data के output को screen में दिखाता है। आउटपुट डिवाइस के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए है।

Monitor
Printer
Speaker
Projector
Headset

स्टोरेज डिवाइस (Storage Device)

स्टोरेज डिवाइस कंप्यूटर का अहम भाग है। Computer storage device किसी प्रकार का hardware होता है जो data को store करता है। इसका एक उदाहरण hard drive और RAM है। कंप्यूटर हार्ड ड्राइव उपयोगकर्ताओं के लिये oprating system, application और files व folder को संग्रहित करती है। Storage Device मुख्यतः दो प्रकार की होती है।

Primary Storage Device आमतौर पर आकार में छोटे अस्थायी रूप से डाटा रखने के लिए बनाए जाते है और computer में internal होते है। इनके पास सबसे तेज data access speed होती है। इनके उदाहरण Ram और Cash Memory इत्यादि है।

Secondary Storage Device इनके पास large storage capacity होती है। यह data को permanent store करके रखते है। यह कंप्यूटर पर आंतरिक या बाहरी हो सकते है। इसने उदाहरण Hard disk, optical disk drive और  USB Storage device शामिल है।

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit)

सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट जिसे हम CPU भी कहते है यह computer का मस्तिष्क है। CPU को हम एक Processor, Central processor, या Microprocessor के रूप मे भी जानते है। यह कंप्यूटर की केंद्रीय इकाई है। इसका काम Hardware और Software से प्राप्त सभी निर्देशो को संभालना है। सभी प्रकार के डिवाइस जैसे desktop, laptop और computer सी.पी.यू का इस्तेमाल करते है। मुख्यतः सी.पी.यू के दो भाग होते है।

ALU अंकगणतीय तर्क इकाई (Arithmetic logic unit): कंप्यूटर का वह भाग है, जो सभी अंकगणितीय संगणनाएँ (Arithmetic computation) जैसे जोड़, गुणा, और सभी तुलयात्मक संचालन करता है।

CU नियंत्रण इकाई (Control Unit): का कंप्यूटर में काम processor के संचालन को निर्देशित करना होता है। आधुनिक कंप्यूटर में नियंत्रण इकाई CPU का आंतरिक हिस्सा होता है।

मदरबोर्ड (Motherboard)

मदरबोर्ड जिसे हम main board या main circuit board के नाम से जानते है यह एक कंप्यूटर की नींव है। यह desktop, laptop आदि के Central Processing Unit (CPU) में लगा एक ऐसा बोर्ड होता है, जो computer के सभी हिस्सों को ऊर्जा प्रदान करता है। सभी computer hardware जैसे CPU, RAM, Keyboard, Monitor या Mouse इत्यादि इससे जुड़े हुए होते है। Motherboard को कंप्यूटर का स्नायु तंत्र (Narvous System) भी कहा जाता है।

कंप्यूटर कैसे काम करता है

आज कंप्यूटर हमारे चारों तरफ है। ज्यादातर लोगो को ये काफी जटिल लगते है। लेकिन अगर आप इनकी बुनियादी चीजो को समझ ले तो Computer कैसे काम करता है यह समझना काफी आसान हो जाएगा। तो चलिए बिल्कुल सरल भाषा मे समझाते है, कंप्यूटर कैसे काम करता है।

Computer एक तरह की मशीन है, जो Input device के निर्देश के अनुसार data प्राप्त करता है। फिर प्राप्त data को memory में store करके उसकी processing करता है और अंत मे result को Output device के माध्यम से हम तक पहुँचाता है। उदाहरण के लिए नीचे image देखे।

कंप्यूटर को निर्देश देने के लिये Input device एक keyboard, mouse या scanner हो सकता है या program किये गए निर्देशों के रूप में कोई software हो सकता है।

निर्देश देने के बाद data की processing केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (CPU) द्वारा की जाती है। इसके बाद वह डाटा output device (monitor, printer, speaker) में भेज दिया जाता है। जिसके बाद आप उसे देख, सुन या प्रिंट कर सकते है। यह एक बहुत सिंपल तरीका है. Computer के कार्य को समझने का मैने आपको इसलिए जटिल भाषा मे नही समझाया क्योंकि उसमें काफी technical language का प्रयोग होता है जो शायद आप आसानी से नही समझ पाते ।

Conclusion

अब अगर इस पोस्ट को समाप्त करे तो निष्कर्ष निकलता है, Computer एक electronic machine है। जिसका जनक Charles Babbage को कहा जाता है। इसका कार्य information store करना, जानकारी को ढूढ़ना और व्यवस्थित करना, परिकलन (calculate) करने व अन्य मशीनों पर नियंत्रण रखना है। इस पोस्ट में हमने आपको कंप्यूटर के इतिहास के बारे में तथा कंप्यूटर कैसे काम करता है इसकी भी पूरी जानकारी सांझा की।

उम्मीद है आपको हमारी इस पोस्ट को समझने में कोई दिक्कत नही हुई होगी । हमारा हमेशा यही मकसद रहता है कि हम किसी भी जानकारी को बड़े ही सरल शब्दों में आप तक पहुंचा सके। उम्मीद है दोस्तो यह पोस्ट Computer क्या है इसका अविष्कार कब और कैसे हुआ? आपके लिए helpful रही होगी।

अंत मे आपसे एक विनम्र निवेदन है कि कृपया इस पोस्ट को Facebook पर अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे। आपके ऐसा करने से हमारी वेबसाइट को लोग जान पाएंगे जिससे हमें motivation मिलेगा और हम आपके लिए ऐसे ही पोस्ट शेयर करते रहेंगे। धन्यवाद।।

जय हिंद / जय भारत

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